हांसी। रोडवेज कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब आम जनता पर साफ दिखाई देने लगा है। हांसी बस स्टैंड पर यात्री बसों के इंतजार में घंटों परेशान होते नजर आए। कोई गांव जाने के लिए बस पूछता रहा तो कोई दिल्ली, हिसार, चंडीगढ़ और करनाल जाने के लिए पूछताछ केंद्र के चक्कर काटता रहा। बसें नहीं मिलने के कारण यात्रियों को निजी वाहनों और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा। हड़ताल के तीसरे दिन रोडवेज कर्मचारियों ने हिसार जीएम का पुतला फूंककर अपना रोष जताया। हिसार डिपो और हांसी सब-डिपो में लंबित वित्तीय भत्तों और बकाया भुगतान की मांग को लेकर रोडवेज कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन चक्का जाम कर रखा है। हड़ताल के चलते हिसार डिपो की 181 और हांसी सब-डिपो की 71 बसों सहित कुल 259 बसों का संचालन प्रभावित हुआ है। इससे लोकल और लंबे रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नाइट ड्यूटी भत्ता, टीए, एलटीसी और मेडिकल बिलों का लंबित भुगतान शामिल है। कर्मचारियों के अनुसार करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का टीए भुगतान अभी तक लंबित है। रोडवेज कर्मचारी जयबीर घणघस एवं मंजीत कुमार ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपने वित्तीय लाभों के भुगतान की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपने के साथ धरना-प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनके खातों में बकाया राशि नहीं आती, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो साझा मोर्चा के आह्वान पर प्रदेशभर के करीब 20 हजार रोडवेज कर्मचारी आंदोलन में शामिल होकर प्रदेशव्यापी चक्का जाम कर सकते हैं। इससे पूरे हरियाणा में बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। हड़ताल के कारण हांसी बस स्टैंड पर यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। करनाल और चंडीगढ़ जाने वाले यात्री आजाद ने बताया कि वे काफी देर से बसों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बसें नहीं मिल रही हैं। सिरसा डिपो की बसें भी निर्धारित समय पर नहीं पहुंच रही हैं। ग्रामीण रूटों पर बस सेवा प्रभावित होने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा।फिलहाल एक तरफ रोडवेज कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ बसों का संचालन प्रभावित होने से आम यात्रियों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। अब सबकी नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है।