किसान संगठनों ने फसल खरीद को लेकर लगाई गई शर्ताें को लेकर किसान संगठनों ने लघु सचिवालय के गेट पर पहुंच कर विरोध जताया। किसान संगठनों ने नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया। फसलों की खरीद के लिए बायोमीट्रिक व समय के नियम को वापस लेने की मांग की। किसानों ने कहा कि लगातार बारिश का मौसम बना हुआ है। ऐसे में अंगूठे के फेर में किसानों को दिक्कत आएगी। एडवोकेट हर्षदीप गिल , ने कहा कि एक किसान कई एकड़ फसल की बिजाई करता है। वह हर बार ट्राली के साथ मंडी नहीं आ सकता। बायोमीट्रिक के लिएम मजबूर करना पूरी तरह से गलत है। सरकार के पास हर एक किसान का पूरा ब्योरा है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के जरिए किसान का पूरा रिकॉर्ड है तो सरकार उससे मिलान कर ले।अगर कोई किसान अधिक फसल लेकर आएगा तो उससे पता लग जाएगा। किसान रात भर खेत में काम करते हैं। कई बार किसान सुबह 4 बजे फसल निकाल लेते हैं।अब किसानों को 8 बजे से पहले मंडी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अब 8बजे का इंतजार करने के चक्कर में किसान की फसल भीग जाएगी तो कौन जिम्मेदार होगा। सरकार किसानों की हमदर्द बनने का दिखावा तो करती है लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। खरीफ में बर्बाद फसलों का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। अब फिर से प्रकृति की मार किसानों पर है। इसलिए सरकार मुआवजे में लेट लतीफी न करके किसानों को ओलावृष्टि से हुए नुकसान का तुरंत पचास हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दे। संयुक्त किसान संघर्ष समिति बालसमंद तहसील ने नायब तहसीलदार बालसमंद को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समिति के प्रधान सुरेन्द्र आर्य ने बताया कि 31 मार्च को हुई ओलावृष्टि के कारण बालसमंद तहसील क्षेत्र के गांवों में किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इसके लिए प्रशासन से तुरंत क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने और किसानों की बर्बाद हुई फसल का पचास हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय भाम्भू ने कहाकि किसानों को अभी तक खरीफ 2025 का मुआवजा और बीमा क्लेम ही नहीं मिला था। सरकार जल्द से जल्द किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करे। इस दौरान पूर्व सरपंच जगदीश लौरा ने कहा कि सरकार को बीमा कम्पनियों की इस खुली लूट पर रोक लगानी चाहिए । कोषाध्यक्ष सत्यबीर गढ़वाल ने कहा कि सरकार तुरंत स्पेशल गिरदावरी करवाकर किसानों को उचित मुआवजा दे।