रतिया की अनाज मंडी में गेहूं की आवक के बीच व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। पोर्टल का सर्वर डाउन होने के कारण गेट पास जारी करने में हो रही अत्यधिक देरी ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। मंडी के मुख्य गेट से लेकर सड़कों तक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी लंबी कतारें लग गई हैं, ।मंडी पहुंचे किसानों ने बताया कि वे तड़के सुबह से ही अपनी फसल लेकर मंडी के बाहर डटे हैं। किसानों का आरोप है कि कर्मचारी केवल "साइट बंद है" कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। घंटों बीत जाने के बाद भी न तो उन्हें गेट पास मिला है और न ही प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी उनकी सुध लेने पहुंचा है।स्थिति का जायजा लेने पहुंचे पगड़ी संभाल जट्टा एवं किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनदीप नथवान ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा की यह पोर्टल और सर्वर की समस्या किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने की एक सोची-समझी नीति है। यदि तकनीकी खामियों को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।नथवान ने फतेहाबाद के उपायुक्त (डीसी) से मांग की है कि बायोमेट्रिक सिस्टम को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए, क्योंकि 11 अप्रैल को हुए प्रदेशव्यापी चक्का जाम के बावजूद सरकार इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए है।इस अव्यवस्था पर मार्केट कमेटी के सचिव राजकुमार ने स्वीकार किया कि पोर्टल का सर्वर धीमा (स्लो) होने के कारण समस्या आ रही है। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों को इस तकनीकी खराबी की शिकायत भेज दी गई है और जल्द ही सर्वर ठीक कर गेट पास जारी करने की प्रक्रिया सामान्य कर दी जाएगी। गेहूं खरीद सीजन की शुरुआत में ही पोर्टल का इस तरह जवाब दे जाना मंडी प्रबंधन और सरकार के दावों की पोल खोल रहा है। चिलचिलाती धूप में सड़कों पर खड़े किसान अब केवल इस इंतजार में हैं कि कब पोर्टल चले और कब उनकी फसल मंडी के भीतर प्रवेश कर सके।