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प्राचीन विरासत 400 वर्ष पुराने मंदिर और देशभक्ति की मिसाल बना खेड़ा गांव

शाहिल शर्मा Updated Sun, 05 Apr 2026 06:14 PM IST

उपमंडल मुख्यालय से करीब 6 किलोमीटर और जिला मुख्यालय से 59 किलोमीटर दूर स्थित गांव खेड़ा अपनी प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक समरसता और देशभक्ति के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। लगभग 750 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1345 में बसे इस गांव का नामकरण भी रोचक है। पुराने समय में यहां के लोग खेतों में निवास करते थे और गांव से बाहर बसने वालों को खेड़ा कहा जाता था जिससे गांव नाम खेड़ा पड़ा। आज गांव नशामुक्त वातावरण की ओर बढ़ते हुए आपसी भाईचारे और विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। गांव में अनाज मंडी, खेल स्टेडियम, बाबा भीमराव अंबेडकर लाइब्रेरी, आईटीआई और आरोही मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल स्थित हैं। इसके अलावा मिडिल स्कूल, आरोग्य हेल्थ सेंटर, पशु अस्पताल, रेस्ट हाउस, सिंचाई विभाग कार्यालय और बिजली विभाग की सुविधाएं उपलब्ध हैं। लगभग 4000 की आबादी और 1965 मतदाताओं वाला यह गांव सामाजिक व राजनीतिक रूप से सक्रिय है। गांव के 10 प्रतिशत लोग भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं। खेड़ा गांव दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पैतृक गांव है। उनके दादा मंगलचंद ने गांव में पेयजल के लिए कुआं बनवाया था। गांव के उद्योगपति सेठ सत्यनारायण गुप्ता चेयरमैन भारत रसायन लिमिटेड ने अपने माता-पिता की स्मृति में नौरंग राय पार्वती देवी सेवा सदन धर्मशाला का निर्माण करवाया और गौशाला में सहयोग दिया। महावीर प्रसाद गुप्ता व उनकी धर्मपत्नी सविता गुप्ता ने गांव की प्राचीन छतरियों का जीर्णोद्धार करवाया। गांव में तीन प्राचीन कुएं भी हैं, जिनसे आसपास के लोग और पशु पानी पीते हैं। धार्मिक रूप से गांव समृद्ध है। यहां स्थित श्री राम मंदिर और श्री श्याम मंदिर सहित अन्य मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराने हैं जो गांव की प्राचीन पहचान को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं। इसके अलावा श्री बालाजी मंदिर, दादी सती मंदिर और दादा भोमिया मंदिर श्रद्धालुओं के प्रमुख केंद्र हैं। मीरा बादशाह की मजार हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। देश सेवा में गांव का योगदान गौरवपूर्ण रहा है। स्वतंत्रता सेनानी गणेश सिंह राजपूत के पुत्र कर्नल डॉ. जगत सिंह तंवर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की और सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा हासिल करते हुए सेना में सेवा के दौरान ही निरंतर अध्ययन जारी रखा।

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