लोहारू शहर में एक ऐसी मार्मिक और प्रेरणादायक घटना सामने आई, जिसने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया। स्वर्गीय मोहरली देवी के निधन के उपरांत उनके अंतिम संस्कार के समय उनकी एकलौती बेटी ने मुखाग्नि देकर न केवल अपनी मां को अंतिम विदाई दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होतीं। मोहरली देवी की कोई दूसरी संतान नहीं थी। ऐसे में उनकी बेटी ने पूरे साहस और दृढ़ संकल्प के साथ मां के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। इस भावुक क्षण ने वहां उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। परिवार की ओर से बताया गया कि इस दुखद घड़ी में बेटी के बच्चे दिलीप, मनोज और रवि व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सके। बावजूद इसके, बेटी ने हिम्मत और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अपनी मां को श्रद्धा और सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। इस कठिन समय में मोहरली देवी के दामाद, राधे श्याम चावला (लोहारू निवासी), अपनी पत्नी के साथ मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने अपनी पत्नी के निर्णय का पूर्ण समर्थन किया और समाज के सामने एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया कि परंपराएं समय के साथ बदलती हैं और बेटियां भी परिवार की जिम्मेदारियां समान रूप से निभाने में सक्षम हैं। अंतिम संस्कार स्थल पर मौजूद लोगों ने परिवार के इस साहसिक कदम की सराहना की। अनेक लोगों ने कहा कि आज की यह घटना समाज के लिए प्रेरणा है और यह दर्शाती है कि बेटियां ही परिवार और वंश की असली आधारशिला हैं।