बक्शीपुर स्थित श्री चित्रगुप्त मंदिर में चित्रांश समाज के लोगों ने कलम दवात की पूजा-अर्चना की। चित्रांश (कायस्थ) समाज द्वारा चित्रगुप्त भगवान की जयंती के दिन कलम और दवात की पूजा की जाती है, जिसे 'कलम-दवात पूजा' या मस्याधार पूजा भी कहते हैं। यह पूजा दीपावली के बाद यम द्वितीया के दिन होती है। इस दिन, समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त का पूजन कर अपने कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं और यह प्रार्थना करते हैं कि आगामी वर्ष में उन्हें बुद्धि, विद्या और लेखन में कुशलता प्राप्त हो। इस दिन कलम का प्रयोग नहीं किया जाता है जब तक कि विधि-विधान से पूजा पूरी न हो जाए।