शहर के एक निजी क्लब के सभागार में शनिवार को हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं की महफिल सजी। एक नई आशा की ओर से आयोजित चतुर्थ वर्ष के हास्य कवि सम्मेलन में देश के अलग-अलग शहरों से आए कवियों ने देर रात तक अपनी रचनाएं सुनाईं। हास्य के बीच कविताओं में बदलते संस्कार, मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल, भारतीय संस्कृति और नारी सम्मान जैसे मुद्दे भी उठे।