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Delhi: जीवन रक्षक दवाओं की काला बाजारी का भंडाफोड़, सरगना समेत चार पकड़े; करोड़ों की नकली दवाएं बरामद

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Thu, 07 May 2026 10:19 PM IST

नकली जीवन रक्षक दवाएं बनाने और सरकारी अस्पताल में मुफ्त मिलने वाली दवाओं की काला बाजारी करने वाले एक अंतरराज्जीय गिरोह का दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में चार आरोपियों को दबोचा है। आरोपियों के पास से करीब 6 करोड़ रुपये की नकली दवाइयां बरामद की गई हैं।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान सरगना मनोज कुमार जैन (56), स्वस्ती विहार, पंचकूला, हरियाणा निवासी राजू कुमार मिश्रा (57), न्यू सोहबतियाब बाग प्रयागराज, यूपी निवासी विक्रम सिंह उर्फ सन्नी (32) और प्रयागराज, यूपी निवासी वतन (35) के रूप में हुई है। पुलिस को मामले में कई अन्य आरोपियों की तलाश है।

सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने दिल्ली, पंजाब और प्रयागराज में छापेमारी कर नकली दवाएं बरामद करने के अलावा आरोपियों को दबोचा है। आरोपी नकली दवाएं बनाने के अलावा सरकरी अस्पताल व डिस्पेंसरी में मिलने वाली दवाओं की री-पैकेजिंग व री-लेबलिंग कर देश के कई राज्यों में बेच रहे थे।

पुलिस ने इनके पास से 90 हजार से अधिक टैबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन, वैक्सीन व दूसरी महंगी दवाएं बरामद की हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं से संबंधित, कैंसर, लिवर, किडनी, मधुमेय, तमाम बिमारियों में लगने वाली वैक्सीन, एंटी रेबीज व दूसरी जीवन रक्षक दवाएं बरामद हुई हैं। आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन की जा रही है।

ऐसे हुआ इस फर्जी दवा रैकेट का खुलासा
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार ने बताया कि उनकी टीम को खबर मिली कि एक अंतरराज्जीय गिरोह सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलने वाली दवाएं और नकली दवाइयां बनाकर बेचने में लिप्त हैं। खबर मिलने के बाद टीम ने उनकी जानकारी जुटाना शुरू की। इस बीच टीम को पता चला कि गिरोह दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर-पूर्वी राज्यों व उत्तरी राज्यों में यह दवाएं सप्लाई कर रहे हैं।

पुख्ता जानकारी जुटाने के दिल्ली और केंद्रीय ड्रग इंस्पेक्टर को इसकी जानकारी देकर छापेमारी में शामिल किया गया। इसके बाद टीम ने मुखर्जी नगर की इंदिरा विकास कालोनी में 22 अप्रैल को छापेमारी की। यहां एक मकान की दूसरी मंजिल पर नकली दवाइयां, कच्चा माल, मशीनें और दूसरे उपकरण बरामद हुए। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली दवाएं भी बरामद हुईं।

यहां आरोपी नकली दवाइयां बनाने के अलावा सरकरी अस्पताल मिलने वाली दवाइयों को री-पैकेजिंग व री-लेबलिंग कर रहे थे। इन पर नई सिरे से तारीख और एमआरपी डाली जा रही थी। पुलिस ने टीम ने यहां से गिरोह के सरगना मनोज कुमार जैन को गिरफ्तार कर लिया। इसकी निशानदेही पर पंचकूला, हरियाणा में 25 अप्रैल को छापेमारी राजू कुमार मिश्रा को गिरफ्तार किया गया।

दोनों से पूछताछ हुई। बाद में प्रयागराज में 29 अप्रैल को छापेमारी कर विक्रम सिंह उर्फ सन्नी और वतन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। विक्रम और वतन ही प्रयाग राज के सरकारी अस्पताल व डिस्पेंसरी से मुफ्त मिलने वाली दवाएं लेकर मनोज व राजू के पास भेजते थे। बाद में उनको री-पैकेजिंग व री-लेबलिंग कर देशभर के अलग-अलग राज्यों में बेच दिया जाता था।

कौन हैं पकड़े गए आरोपी
मूलरूप से मणिपुर का रहने वाला 12वीं पास मनोज कुमार जैन पहले मणिपुर में ही कंस्ट्रक्शन का काम करता था। 2024 में वह दिल्ली आ गया। उसने अपने पंचकूला के दोस्त राजू कुमार के कहने पर उसके साथ मिलकर करीब डेढ़ साल पहले नकली दवाएं बनाने का धंधा दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में शुरू किया। इस बीच वह सरकरी दवाओं को भी अवैध रूप से बेचने लगे।

राजू कुमार अपने भाई की क्लीनिक पर बैठता था। यहां से उसने दवाओं की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद कोविड के दौरान 2020 में उसने मास्क और ग्लव्स का धंधा शुरू किया। बाद में मुनाफा होने पर उसने यूनिटेल के नाम से डेराबस्सी, एसएएस नगर, पंजाब में एक थर्ड पार्टी दवा बनाने की कंपनी खोली। 

इस बीच इसने अपने दोस्त मनोज के साथ नकली दवाएं बनाना शुरू किया। वहीं लैब टेक्निशियन का डिप्लोमा किए विक्रम का प्रयागराज के एक सरकारी अस्पताल के बाहर सीआरएल के नाम से लैब है। इस दौरान उसका सरकारी अस्पताल में आना-जाना रहता था। वर्ष 2022 में उसने सर्जिकल सप्लायर वतन के साथ मिलकर सरकारी अस्पताल व डिस्पेंसरी में मिलने वाली दवाओं का धंधा शुरू कर दिया।

एमबीए पास वतन ने 2021 में मास्क बनाने का काम किया। इंडिया मार्ट के जरिए उसकी मुलाकात मनोज कुमार जैन से हुई। विक्रम के साथ मिलकर वतन ने मनोज कुमार जैन व राजू कुमार मिश्रा को सरकारी अस्पताल की दवाएं बेचना शुरू कर दिया। इसके बदले उनको मोटा मुनाफा होने लगा।

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