जिला प्रशासन नूंह द्वारा गुरुवार को केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेस-वे पर गांव खेड़ा खलीलपुर के पास बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से बनाए गए ढाबों को हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान करीब 40 अवैध ढाबों को हटाया गया, जो कि केएमपी एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर 100 मीटर की ग्रीन बेल्ट सीमा के अंदर अवैध रूप से बनाए गए थे। यह कार्रवाई उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) नूंह अंकिता पुवार की उपस्थिति में तथा ड्यूटी मजिस्ट्रेट जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) बिनेश कुमार की देखरेख में की गई। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस विभाग, बिजली विभाग व अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। एसडीएम अंकिता पुवार ने बताया कि केएमपी एक्सप्रेस-वे के आसपास अवैध निर्माण एवं ढाबों की स्थापना सुरक्षा एवं यातायात के दृष्टिकोण से ठीक नहीं थे। ग्रीन बेल्ट में किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या निजी निर्माण सख्त वर्जित है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर ऐसे अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में गत दिनों उपायुक्त अखिल पिलानी द्वारा केएमपी के आसपास स्थित अवैध ढाबों को हटाने संबंधी निर्देशों के अनुपालना में आज यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीन बेल्ट या हाईवे की निर्धारित सीमा में किसी भी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण या ढाबा निर्माण करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आमजन से अपील की कि वे नियमों का पालन करें और अवैध निर्माण आदि से बचें। रातों-रात तो नहीं बने थे ये ढाबे: जिला प्रशासन द्वारा केएमपी के पास बने ढाबों को हटाने की बड़ी कार्रवाई गुरुवार को की गई, लेकिन उसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए। इनमें से कई ढाबे पक्का निर्माण कर बनाए गए थे, जो रातों-रात बनकर तैयार नहीं होते। काफी लंबे समय से ये ढाबे यहां चल रहे थे और इनके कारण लूटपाट जैसी घटनाएं, अवैध रुप से केएमपी पर वाहन खड़ा करने के कारण दुर्घटनाओं में लोगों की मौतें भी हुई है। जब इन अवैध ढाबों का निर्माण किया जा रहा था या फिर सालों से इन्हें यहां चलाया जा रहा था, क्या उस समय ये अवैध नहीं थे और यदि उस समय ये अवैध थे तो इन्हें क्यों नहीं रोका गया, जैसे कई सवाल प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद खड़े हुए है।