बिरौंडा गांव को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने भले ही दो दशक पहले आदर्श गांव घोषित कर दिया हो, लेकिन यहां के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बने बारात घर, शमशान घाट और कब्रिस्तान जर्जर स्थिति में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्राधिकरण के अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिस कारण इनकी स्थिति दिन पर दिन खराब होती जा रही है। बारात घर का बिल्कुल प्रयोग ही नहीं हो पा रहा है। वहीं, शमशान घाट और कब्रिस्तान भी देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहे हैं। अमर उजाला के ग्रामीण संवाद में सोमवार को बिरौंडा गांव के ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं बताई। ग्रामीणों का आरोप है कि जबसे प्रधानी खत्म हुई है तब से गांव का विकास रूक गया है। गांव में नगर पालिका या नगर पंचायत की मांग की है। गांव के मुख्य मार्ग से लेकर गलियों की स्थिति बदहाल हो चुकी है। जिसके चलते लोगों को आवागमन करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़कें जर्जर होने के कारण दोपहिया वाहन सवार हादसे का शिकार होते रहते हैं। इसके अलावा गांव में जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में गांव में घुटनों से पानी भर जाता है। जिससे निकलना लोगों की मजबूरी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव होने से गांव में बीमारियां भी फैली रहती हैं। साथ ही गांव की गलियों में झाड़ू नहीं लगने के कारण चारों तरफ गंदगी फैली रहती है जिससे मच्छर पनपते हैं और बीमारियां फैलती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की नालियां भी साफ करने सफाई करने नहीं आता है। जिस कारण नालियों का गंदा पानी सड़कों पर भरा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली के पोल पर लगी स्ट्रीट लाइटें सिर्फ शोपीस के लिए लगी हुई हैं। करीब 80 फीसदी लाइटें जलती ही नहीं हैं। जिस कारण गांव में रात के समय में अंधेरा बना रहता है।