प्रदूषण से घिरे रहने वाला गौतमबुद्ध नगर जिला निवासियों को स्मोकिंग की लत ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। स्मोकिंग से बीमार पड़ने वाले जिले के करीब 500 से 600 मरीज ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) पहुंच रहे हैं। जिसमें से करीब 70 मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इनमें से लगभग 30 को आईसीयू में भर्ती किया जा रहा है। वहीं, डॉक्टर अलग-अलग तरह की सलाह देकर प्रति माह 40 लोगों की स्मोकिंग की लत को छुड़ा रहे हैं। ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित जिम्स में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की डॉक्टर रश्मि उपाध्याय ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर जिले में सबसे सिगरेट से ज्यादा हुक्के का प्रयोग करने वाले लोग फेफड़ों और श्वास से संबंधित मरीज आते हैं। 40 से 70 वर्ष तक के लोग ज्यादा इससे पीड़ित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों की सूची में ग्रेटर नोएडा और नोएडा भी हैं। उन्होंने बताया कि इस कारण यहां के निवासियों को स्मोकिंग की लत ज्यादा जल्दी बीमार करती है। हर महीने अस्पताल में फेफड़ों और श्वास से संबंधित जुड़े करीब 500 से 600 मरीज आते हैं। डॉक्टर रश्मि उपाध्याय ने बताया कि हर महीने लगभग 40 लोगों को स्मोकिंग की लत का पीछा छुड़ा रही हैं। उन्होंने बताया कि स्मोकिंग की लत छोड़ने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है जो व्यक्ति हुक्का, बीड़ी और सिगरेट पी रहा है। उसे अंदर से खुद तैयार होना होगा कि हमें स्मोकिंग छोड़नी है। तभी व्यक्ति स्मोकिंग छोड़ सकता है। स्मोकिंग की तलब लगने पर लौंग और ब्लैक कॉफी के अलावा सौंप प्रयोग करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग तनाव पर ही स्मोकिंग करते हैं। इससे बचने के लिए व्यायाम करने करना चाहिए। साथ ही गहरी सांस लेने से तनाव कम होता है और धूम्रपान की इच्छा कम होती है। जब भी स्मोकिंग करने की इच्छा हो तो हमें अपने ध्यान को भटकाना चाहिए। इसके अलावा निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एनआरटी) का उपयोग करें। निकोटीन गम, पैच या लोजेंजेस का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।