दस सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। देश के राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी मेघा रुपम को सौंपा। जिसमें एमएसपी लागू करने, बिजली बिल खत्म करने, किसानों को नए जमीन अधिग्रहण कानून का लाभ देने समेत मांगें शामिल है।अपनी मांगों को लेकर यमुना प्रभावित 6 जिलों के किसान जल्द ही बडा आंदोलन चलाएंगे। यूनियन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पवन खटाना के नेतृत्व में यूनियन के पदाधिकारी कलेक्ट्रेट में एकत्र हुए। वहां पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश के सभी जिलों में किसान जिला स्तर पर आज धरना देकर ज्ञापन दे रहे है। भारत सरकार ने 9 दिसंबर 2021 को दिए आश्वासन को पूरा नहीं किया है। जिससे परेशान होकर आज किसान धरना करने के लिए मजबूर है। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में बिजली के बिलों को तुरंत वापस लेने, सार्वजनिक उपकमों के निजी करण बंद करने, मनरेगा बजट बढ़ाने, सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदने समेत मांगें की है। उन्होंने कहा कि जिले के किसान परेशान है। किसानों को जमीन खरीद के दौरान नए जमीन अधिग्रहण कानून का लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों को 10 फीसदी भूखंड, अतिरिक्त मुआवजा, रोजगार समेत सुविधाएं नहीं मिल रही है। किसानों की पुरानी आबादी को अतिक्रमण के नाम पर तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण से प्रभावित 6 जिलों के किसानों जल्द ही जीरो पाइंट पर आंदोलन चलांगे। इसको लेकर उनके नेता राकेश टिकैत ने भी घोषणा कर दी है। किसानों का कहना है कि अगर किसानों की मांगों को प्राधिकरण और सरकार ने पूरी नहीं किया तो बडे स्तर पर किसान आंदोलन होगा।