वंचित वर्ग के लोगों के लिए न्याय की ओर कदम बढ़ाना आसान हुआ है। आपराधिक मामलों में जेल में बंद लोगों को मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से विधिक सेवा प्राधिकरण के अधीन स्थापित विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली (एलएडीसीएस) से 20 महीने में 683 लोगों को जमानत दिलवाने के लिए प्रार्थना पत्र दायर किए गए हैं। यह सभी वह लोग थे जो अपनी आर्थिक स्थिति के कारण वकीलों की फीस चुकाने में असमर्थ थे। सूरजपुर कोर्ट परिसर में 21 जनवरी 2023 में एलएडीसीएस की स्थापना हुई थी। इसके तहत गरीब, निर्धन एवं असहाय अभियुक्तों और बंदियों को दंड प्रकिया संहिता के प्रत्येक चरण पर निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। वर्तमान में एलएडीसीएस चीफ, दो डिप्टी एलएडीसीएस चीफ, तीन असिस्टेंट एलएडीसीएस कार्यरत है। जिनका काम जेल में जाकर ऐसे बंदियों और कैदियों की पहचान करना है जो जमानत के लिए अधिवक्ता नहीं होने के कारण अपील नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही ऐसे लोग जिनके पास ट्रायल के दौरान कोर्ट में जाने के लिए कोई अधिवक्ता नहीं है। एलएडीसीएस की टीम ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराती है। बाल सुधार गृह में जाकर भी नाबालिगों को कानूनी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। टीम ने अपनी स्थापना के बाद न सिर्फ 693 बंदियों की जमानत के लिए उनसे संपर्क करने के बाद जरूरी कानूनी सेवा उपलब्ध करा कोर्ट में आवेदन किया। बल्कि सैकड़ों मामले में ट्रायल भी शुरू कराया है। कई तो ऐसे भी बंदी मिले जो पहले निजी वकीलों के माध्यम से अपना केस लड़ रहे थे, लेकिन जब आर्थिक तंगी आई तो उन्होंने निजी अधिवक्ताओं का साथ छोड़कर एलएडीसीएस की टीम से संपर्क करके कानूनी सहायता प्राप्त की है।