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Faridabad: 'एंटीबायोटिक का अंधाधुंध इस्तेमाल बन रहा गंभीर खतरा', जानें क्या बोले एकॉर्ड अस्पताल के डॉक्टर

एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित और बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल से स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निमोनिया, यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) और सेप्सिस जैसी आम लेकिन गंभीर बीमारियों में प्रयुक्त कई एंटीबायोटिक अब पहले जैसी प्रभावी नहीं रहीं। रिपोर्ट के अनुसार इसका मुख्य कारण दवाओं का अधूरा कोर्स और स्वयं दवा लेना है। ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि यह समस्या अब शहर में तेजी से उभर रही है। सर्दी-खांसी, बुखार या हल्के संक्रमण में भी लोग मेडिकल स्टोर से सीधे एंटीबायोटिक खरीदकर सेवन कर रहे हैं, जिससे बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) कहा जाता है। डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक असर नहीं कर पा रही।

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