बिहार की सियासत में हर दिन नया मोड़, नई हलचल! चुनावी जोश अब पहुंचा है गोपालगंज, उस मिट्टी पर, जहां राजनीति सिर्फ की नहीं जाती, बल्कि जी जाती है। अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ आज थमा है इसी ऐतिहासिक जिले में, जहां खेतों की खुशबू और चौक-चौराहों की चर्चाओं में चुनाव की गूंज साफ सुनाई देती है। सुबह की चाय की चुस्की से लेकर शाम की पंचायत तक हर जुबान पर एक ही सवाल है, इस बार किसके साथ है गोपालगंज? जनता का मूड, उम्मीदों की दिशा और सियासी समीकरण सबकुछ जानिए सिर्फ अमर उजाला के ‘सत्ता का संग्राम’ में, जहां हर राय बनेगी लोकतंत्र की आवाज और हर आवाज लिखेगी सत्ता की नई कहानी। स्थानीय निवासी मृत्युंजय उपाध्याय ने चुनावी माहौल पर कहा, "लालू यादव का असर यहां अब भी खत्म नहीं हुआ है। हम बाहर भले कुछ और कहें, लेकिन उनका नाम आज भी लिया जाता है।" गोपालगंज के मुद्दों पर उन्होंने कहा, "अभी तक कुछ साफ नहीं है। लोग बातें तो विकास की करते हैं, लेकिन वोट जाति के हिसाब से ही देंगे।" इसके अलावा उन्होंने कहा, "इस बार ऐसा लग रहा है कि बीजेपी को यहां से हार का सामना करना पड़ सकता है।" सतीश चंद्र ने शराबबंदी पर कहा, "शराबबंदी होना जरूरी है, लेकिन फिर भी लोगों को शराब मिल रही है, यह गलत है।" उन्होंने आगे कहा, "जब तक उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं हो जाता, तब तक कुछ कहना मुश्किल है।" तेजस्वी यादव को लेकर उन्होंने कहा, "उन्होंने अब तक कोई बड़ा काम नहीं किया है।"