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उत्तर दिशा का प्रभाव
वैज्ञानिक मत के अनुसार मनुष्य का शरीर चुम्बकीय तरंगों से प्रभावित होता है और मनुष्य का शरीर स्वयं सूक्ष्म चुम्बकीय तरंगों को फेंकता भी है जो प्रभामंडल में आकर्षण एवं विकर्षण उत्पन्न करती हैं। जिस प्रकार पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव है ठीक उसी प्रकार से मनुष्य शरीर का मस्तिष्क वाला हिस्सा उसका उत्तरी ध्रुव माना गया है। इसलिए विश्राम के लिए व्यक्ति का सिर वाला हिस्सा सदैव दक्षिण ध्रुव की ओर रहना चाहिए ताकि चुम्बकीय तरंगें सही दिशा में प्रवाहित हो सकें। इसके विपरीत उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से चुम्बकीय प्रवाह अवरुद्ध होकर बिगड़ जाएगा जिस कारण मनुष्य को ठीक से नींद नहीं आ पाएगी। वास्तु के अनुसार इस दिशा में सिर करके सोने से नींद बाधित होती है जिस कारण सिरदर्द रह सकता है। जो लोग उत्तर की तरफ सिर एवं दक्षिण की तरफ पैर रखकर सोते हैं ऐसे लोग रातभर करवटें बदलते रहेंगे,सुबह उठकर भी आलस्य बना रहेगा। मानसिक बीमारियों की संभावना बढ़ जाएगी अतः वास्तु की मानें तो इस दिशा में सिर करके कभी न सोएं।