विज्ञापन

नोबेल पुरस्कार विजेता कवि हैरॉल्ड पिंटर की कविता : हँसी

अमर शर्मा

Vishwa Kavya
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            हँसी थम जाती है पर कभी नहीं होती खत्म
        
                                                    
                            
हँसी झुठाने में लगा देती है अपना पूरा दम

हँसी हँसती है उस पर जो है अनकहा हर दम
ये झरती है और किकयाती है और रिसती है दिमाग़ में

ये झरती है और किकयाती है लाशों के दिमाग़ों में
यूँ सारे झूठ हँसते-हँसते किए जाते हैं फ़राहम

जिन्हें सोख लेती है सिर कटी लाशों की हँसी बेदम
जिन्हें सोख लेते हैं हँसती लाशों के मुँह हर कदम 

मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल एकलव्य
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile