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Bob Dylan Poetry: छिछला, निरुद्देश्य और लक्ष्यहीन जीवन हमें स्वीकार नहीं

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
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कठिनाइयों से रीता जीवन
मेरे लिए नहीं,
नहीं, मेरे तूफ़ानी मन को यह स्वीकार नहीं।

मुझे तो चाहिए एक महान ऊंचा लक्ष्य
और, उसके लिए उम्रभर संघर्षों का अटूट क्रम।

ओ कला! तू खोल
मानवता की धरोहर, अपने अमूल्य कोषों के द्वार
मेरे लिए खोल!
अपनी प्रज्ञा और संवेगों के आलिंगन में
अखिल विश्व को बांध लूंगा मैं!

आओ,
हम बीहड़ और कठिन सुदूर यात्रा पर चलें
आओ, क्योंकि – छिछला, निरुद्देश्य और
लक्ष्यहीन जीवन
हमें स्वीकार नहीं।

हम ऊँघते, क़लम घिसते हुए
उत्पीड़न और लाचारी में नहीं जिएंगे।
हम – आकांक्षा, आक्रोश, आवेग और
अभिमान में जिएंगे।
असली इनसान की तरह जिएंगे।

2 वर्ष पहले
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