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कितने रास्ते तय करे आदमी कि तुम उसे इंसान कह सको - बॉब डिलन

हरि कर्की

Vishwa Kavya
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                                                  कितने रास्ते तय करे आदमी
कि तुम उसे इंसान कह सको?
कितने समन्दर पार करे एक सफ़ेद कबूतर
कि वह रेत पर सो सके ?
हां, कितने गोले दागे तोप
कि उन पर हमेशा के लिए पाबन्दी लग जाए?
मेरे दोस्त, इनका जवाब हवा में उड़ रहा है
जवाब हवा में उड़ रहा है।
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कितने साल ज़िन्दा रह सकते हैं कुछ लोग कि उसके पहले उन्हें आज़ाद किया जा सके?

हां, कितने साल क़ायम रहे एक पहाड़
कि उसके पहले समन्दर उसे डुबा न दे?
हां, कितने साल ज़िन्दा रह सकते हैं कुछ लोग
कि उसके पहले उन्हें आज़ाद किया जा सके?
हां, कितनी बार अपना सिर घुमा सकता है एक आदमी
यह दिखाने कि उसने कुछ देखा ही नहीं?
मेरे दोस्त, इनका जवाब हवा में उड़ रहा है
जवाब हवा में उड़ रहा है।

कितनी बार एक आदमी ऊपर की ओर देखे कि वह आसमान को देख सके?

हां, कितनी बार एक आदमी ऊपर की ओर देखे
कि वह आसमान को देख सके?
हां, कितने कान हो एक आदमी के
कि वह लोगों की रुलाई को सुन सके?
हां, कितनी मौतें होनी होगी कि वह जान सके
कि काफ़ी ज़्यादा लोग मर चुके हैं ?
मेरे दोस्त, इनका जवाब हवा में उड़ रहा है
जवाब हवा में उड़ रहा है।

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : भोला रबारी

साभार - कविता कोश
5 वर्ष पहले
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