लोग अक्सर अपने जज़्बातों को बयां करने के लिए शेर ओ शायरी का सहारा लेते हैं। इसलिए कई बार लोगों के सोशल मीडिया पर उनके जज़्बात शायराना अंदाज़ में देखने के मिल जाते हैं। सोशल मीडिया पर यूं तो समय और मूड के हिसाब से लोग शेर-ओ-शायरी शेयर कर लेते हैं। लेकिन ख़ास तौर पर कुछ शायर बेहद प्रचलित हैं। उनमें आज के लेखक भी शामिल हैं। पढ़ें उनके लिखे कुछ मज़ेदार शेर और रचनाएं
मिर्ज़ा ग़ालिब
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना आदमी हम भी थे काम के
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
उनके देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है
मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमां लेकिन फिर भी कम निकले
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इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊं
वरना यूं तो किसी की नहीं सुनी मैंने
यूं जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
ये मुझे चैन क्यूं नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
इक हुनर है जो कर गया हूं मैं सबके दिल से उतर गया हूं मैं
क्या बताऊं के मर नहीं पाता जीते जी जब से मर गया हूं मैं
अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुमने किसी के साथ मुहब्बत निभा तो दी
आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें
हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं
इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ
जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से
कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया
जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया
जो खो गया मैं उस को भुलाता चला गया
लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यूं हैं
इतना डरते हैं तो घर से निकलते क्यूं हैं
शाख ले टूट जाएं वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधियों से कोई कह दे कि औकात में रहे
आंख में पानी रखों होंठ पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरक़ीबें बहुत सारी रखो
फूंक डालूंगा मैं किसी रोज़ दिल की दुनिया
ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूं
नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है
ना हमसफ़र ना किसी हमनशीं से निकलेगा
हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेग
आत्महत्या का बेहतरीन तरीक़ा होता है
इच्छा की फ़िक्र किए बिना जीते चले जाना
सारे सिकंदर घर लौटने से पहले ही मर जाते हैं
दुनिया का एक हिस्सा हमेशा अनजीता छूट जाता है
प्रेम के मक़बरे जो बनाए गए हैं वहाँ बैठ प्रेम की इजाज़त नहीं
पुरातत्वविदों का हुनर वहाँ बौखलाया है
बुद्धिमान लोगों की तरह बोलो
नहीं तो ऐसा बोलो
जिससे आभास हो कि तुम बुद्धिमान हो
अगर तुम्हारा एक आंसू
इस काग़ज़ पर न पड़ा होता
तो यह कब का उड़ चुका होता