विज्ञापन

Social Media Poetry: भावनाओं पर नियंत्रण कर नहीं पाये कभी भी

काव्य डेस्क

Viral Kavya
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  देह पानी थी हमें इक दूसरे की, पा चुके हैं 
क्यों न अब हम प्यार का नाटक 
यहीं पर खत्म कर दें ! 

प्यार को बदनाम करने में कसर हमने न छोड़ी
वासनाओं  को  रुपहले  आवरण हमने दिये हैं 
भावनाओं पर नियंत्रण कर नहीं पाये कभी भी 
सभ्यता के साथ वर्जित आचरण हमने किये हैं 

हम तुम्हारा तुम हमारा मन बहुत बहला चुके हैं 
चिह्न सब सम्बंध के वाचक 
यहीं पर खत्म कर दें ! 

आग  से  पानी  मिलाकर देखना ही था हमें तो 
भाप बनकर उड़ गयी हर एक जिज्ञासा हमारी 
है बहुत संभव कि हम इक दूसरे को मार डालें
अब बदलने भी लगी है दिन ब दिन भाषा हमारी

स्वप्न में देखे गये वे चित्र सब धुँधला चुके हैं 
जो गढ़े थे प्यार के मानक 
यहीं पर खत्म कर दें ! 
विज्ञापन

यह समय की माँग है हम भूल जायें हर कहानी
तुम किसी से क्या कहोगी मैं किसी से क्या कहूँगा
तुम किसी के साथ फेरे घूम अर्धांगिनि बनोगी 
मैं    कहीं   सिन्दूर  बन  सिन्दूरदानी  में  रहूँगा

खींचने को लोग दोनों ओर से ही आ चुके हैं 
आज अपने बीच का चुम्बक
यहीं पर खत्म कर दें ! 

साभार:- ज्ञान प्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pankaj Sharma

1223 कविताएं

View Profile