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Social Media Poetry: जानता हूँ मैं तुम्हारा प्यार कोई और है !

काव्य डेस्क

Viral Kavya
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                            तुम न जाने क्यों हमारे साथ चलना चाहती हो,
        
                                                    
                            
जानता हूँ मैं तुम्हारा प्यार कोई और है !

कह सको तो ही बताओ क्या विवशता है तुम्हारी
या कहीं पर तुम समर्पण कर चुकी फिर हार आई
हम बहुत खुश हैं  मगर मन काँप उठता है हमारा
राज महलों  की  महक क्यों निर्धनों के द्वार आई

सच बताओ क्या पुनः इस बार छलना चाहती हो,
या कि नकली प्रेम का आधार कोई और है ?

याद हैं वह दिन कि जब हम ही तुम्हारा प्यार थे बस 
एक  फागुन  तब  हमारे पास मुस्काया हुआ था
एक  दिन  ठुकरा  दिया  तुमने हमारे नेह का घर
कौन जाने कौन था वह जो तुम्हे भाया हुआ था

आज  पश्चाताप  में  इस पार  जलना चाहती हो
सच बताओ क्या अभी उस पार कोई और है ?

हम भला भोगी हुई इस देह का अब क्या करेंगे
सच बताएं हम तुम्हारी आत्मा तक विष लगा है
जिस तरह तुम आ गई हो आज मायावी बनी हो
इस तरह तुमने न जाने और कितनों को ठगा है

तुम हमारे साथ क्या अब भी टहलना चाहती हो
तो सुनो अब इसलिये तैयार कोई और है !

साभार: ज्ञानप्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

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