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Social Media Poetry: नये समय की नयी चुनौती

काव्य डेस्क

Viral Kavya
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                            नये समय  की  नयी  चुनौती
        
                                                    
                            
प्रश्न  पुराने, यक्ष !  बदल दो ! 

वर्तमान   पर   चर्चा   करती
एक   सभा   है  अंधी  बहरी
कोई  कहता  नहीं  लोक  से
अब इसका अध्यक्ष बदल दो !

राजाओं  के    सम्मोहन  में
कब   तक    बैठोगे   पैताने
थोड़ी  हिम्मत  करो  नशे से -
जागो ,अपना पक्ष बदल दो !

सबको आया नहीं कभी भी
हर  युग  में प्रासंगिक रहना 
यदि वे  अपने  तीर बदल दें 
तुम भी अपने वक्ष बदल दो !

जहाँ जहाँ भी  पड़ें  सुनायी 
तुमको   गुप्तचरी   पदचापें 
बिना बताये उन महलों को
अपने अपने कक्ष बदल दो ! 

साभार: ज्ञान प्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

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