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Hindi Shayari: वाली आसी- फैलता जाता है नफ़रत का धुआँ इश्क़ करो

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  फैलता जाता है नफ़रत का धुआँ इश्क़ करो 
बुझ न जाए कहीं ये शो'ला-ए-जाँ इश्क़ करो 

इश्क़ बिन जीने के आदाब नहीं आते हैं 
'मीर' साहब ने कहा है कि मियाँ इश्क़ करो 

कज-अदाई न फ़क़ीरों को दिखाओ यारो 
एक शब के लिए मेहमाँ हैं यहाँ इश्क़ करो 
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कल न हम होंगे न तुम होगे न ये हंगामे 
कोई दिन और है ये रंग-ए-जहाँ इश्क़ करो 

इश्क़ के सौदे में नुक़सान बहुत है 'वाली' 
पर कभी बंद न हो दिल की दुकाँ इश्क़ करो 

2 वर्ष पहले
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