विज्ञापन

Shayari: शाम पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  

शाम बे-कैफ़ सही शाम है ढल जाएगी
दिन भी निकलेगा तबीअ'त भी सँभल जाएगी
- जलील निज़ामी 


भटकी है उजालों में नज़र शाम से पहले
ये शाम ढले का सा असर शाम से पहले
- सज्जाद बाबर

विज्ञापन

चाँद तारों की जो महफ़िल थी सजी शाम के बाद
मुझ को महसूस हुई तेरी कमी शाम के बाद
- उस्मान शाहीन 


किस काँधे पर अश्क बहाऊँ शाम गए
किस को अपने ज़ख़्म दिखाऊँ शाम गए
- आयाज़ रसूल नाज़की 

बस एक शाम का हर शाम इंतिज़ार रहा
मगर वो शाम किसी शाम भी नहीं आई
- अजमल सिराज 


शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है
उम्र ढल जाती है जल्दी पलट आना मिरे दोस्त
- अशफ़ाक़ नासिर 

सुब्ह ये फ़िक्र कि हो जाए शाम
शाम को ये कि सहर हो जाए
- अब्दुल मजीद हैरत 


वो मुझे छोड़ के इक शाम गए थे 'नासिर'
ज़िंदगी अपनी उसी शाम से आगे न बढ़ी
- हकीम नासिर

शाम होती है तो मेरा ही फ़साना अक्सर
वो जो टूटा हुआ तारा है सुनाता है मुझे
- उबैदुल्लह सिद्दीक़ी 


शाम ख़ामोश है पेड़ों पे उजाला कम है
लौट आए हैं सभी एक परिंदा कम है
- फ़हीम जोगापुरी

4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kamlesh ranjan

1 कविता

View Profile