शाम बे-कैफ़ सही शाम है ढल जाएगी
दिन भी निकलेगा तबीअ'त भी सँभल जाएगी
- जलील निज़ामी
भटकी है उजालों में नज़र शाम से पहले
ये शाम ढले का सा असर शाम से पहले
- सज्जाद बाबर
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चाँद तारों की जो महफ़िल थी सजी शाम के बाद
मुझ को महसूस हुई तेरी कमी शाम के बाद
- उस्मान शाहीन
किस काँधे पर अश्क बहाऊँ शाम गए
किस को अपने ज़ख़्म दिखाऊँ शाम गए
- आयाज़ रसूल नाज़की
बस एक शाम का हर शाम इंतिज़ार रहा
मगर वो शाम किसी शाम भी नहीं आई
- अजमल सिराज
शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है
उम्र ढल जाती है जल्दी पलट आना मिरे दोस्त
- अशफ़ाक़ नासिर
सुब्ह ये फ़िक्र कि हो जाए शाम
शाम को ये कि सहर हो जाए
- अब्दुल मजीद हैरत
वो मुझे छोड़ के इक शाम गए थे 'नासिर'
ज़िंदगी अपनी उसी शाम से आगे न बढ़ी
- हकीम नासिर
शाम होती है तो मेरा ही फ़साना अक्सर
वो जो टूटा हुआ तारा है सुनाता है मुझे
- उबैदुल्लह सिद्दीक़ी
शाम ख़ामोश है पेड़ों पे उजाला कम है
लौट आए हैं सभी एक परिंदा कम है
- फ़हीम जोगापुरी