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Sahir Ludhianvi Poetry: मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी
मुझ को रातों की सियाही के सिवा कुछ न मिला

मैं वो नग़्मा हूँ जिसे प्यार की महफ़िल न मिली
वो मुसाफ़िर हूँ जिसे कोई भी मंज़िल न मिली
ज़ख़्म पाए हैं बहारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

किसी गेसू किसी आँचल का सहारा भी नहीं
रास्ते में कोई धुँदला सा सितारा भी नहीं
मेरी नज़रों ने नज़ारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

दिल में नाकाम उमीदों के बसेरे पाए
रौशनी लेने को निकला तो अँधेरे पाए
रंग और नूर के धारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

मेरी राहों से जुदा हो गईं राहें उन की
आज बदली नज़र आती हैं निगाहें उन की
जिन से इस दिल ने सहारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

प्यार माँगा तो सिसकते हुए अरमान मिले
चैन चाहा तो उमड़ते हुए तूफ़ान मिले
डूबते दिल ने किनारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

2 वर्ष पहले
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