विज्ञापन

Urdu Poetry: नाज़िम नक़वी की ग़ज़ल- देखिए किस को रास आते हैं

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  देखिए किस को रास आते हैं 
अच्छे दिन सब के पास आते हैं 

एक भी काम का नहीं होता 
फ़ोन दिन में पचास आते हैं 

कल तो वा'दा भरे गिलास का था 
आज ख़ाली गिलास आते हैं 

तुम को बदलाव चाहिए ठहरो 
हम बदल कर लिबास आते हैं 

पहले बनती है सीता अपराधी 
बा'द में तुलसीदास आते हैं 

सारी दुनिया से मिल-मिला कर हम 
आख़िरश अपने पास आते हैं 
विज्ञापन

शाम होती है तब कहीं जा कर 
वापस अपने हवास आते हैं 

जाने क्या हो गया है 'नाज़िम' को 
हर जगह वो उदास आते हैं 

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all