विज्ञापन

Nasir Kazmi Poetry: देख मोहब्बत का दस्तूर, तू मुझ से मैं तुझ से दूर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            


देख मोहब्बत का दस्तूर
तू मुझ से मैं तुझ से दूर

तन्हा तन्हा फिरते हैं


दिल वीराँ आँखें बे-नूर

दोस्त बिछड़ते जाते हैं


शौक़ लिए जाता है दूर

हम अपना ग़म भूल गए


आज किसे देखा मजबूर

दिल की धड़कन कहती है


आज कोई आएगा ज़रूर

कोशिश लाज़िम है प्यारे


आगे जो उस को मंज़ूर

सूरज डूब चला 'नासिर'


और अभी मंज़िल है दूर

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pankaj Sharma

1223 कविताएं

View Profile