आज भी 'प्रेम' के और 'कृष्ण' के अफ़्साने हैं
आज भी वक़्त की जम्हूरी ज़बाँ है उर्दू
- अता आबिदी
प्यार में कैसी थकन कह के ये घर से निकली
कृष्ण की खोज में वृषभानु-लली मीलों तक
- कुंवर बेचैन
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वो रातों-रात 'सिरी-कृष्ण' को उठाए हुए
बला की क़ैद से 'बसदेव' का निकल जाना
- फ़िराक़ गोरखपुरी
वो रातों-रात 'सिरी-कृष्ण' को उठाए हुए
बला की क़ैद से 'बसदेव' का निकल जाना
- फ़िराक़ गोरखपुरी
जहां देखो वहां मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है
उसी का सब है जल्वा जो जहां में आश्कारा है
- भारतेंदु हरिश्चंद्र
देखिए होगा श्री-कृष्ण का दर्शन क्यूं-कर
सीना-ए-तंग में दिल गोपियों का है बेकल
- मोहसिन काकोरवी
राम और कृष्ण के जीवन से तुझे प्यार मगर
बादा-ए-हुब्ब-ए-मोहम्मद से भी सरशार मगर
- कंवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
किसी समय में धनुष-बान को संभाला था
इसी दयार ने देखी है 'कृष्ण' की लीला
- फ़िराक़ गोरखपुरी
कृष्ण का हूं पुजारी अली का बंदा हूं
'यगाना' शान-ए-ख़ुदा देख कर रहा न गया
- यगाना चंगेज़ी
रौशनी ऐसी अजब थी रंग-भूमी की 'नसीम'
हो गए किरदार मुदग़म कृष्ण भी राधा लगे
- इफ़्तिख़ार नसीम
जिस की हर शाख़ पे राधाएं मचलती होंगी
देखना कृष्ण उसी पेड़ के नीचे होंगे
- बेकल उत्साही
दीवार-ओ-दर पे 'कृष्णा' की लीला के नक़्श है
मंदिर है ये तो 'कृष्ण' के दरबार की तरह'
- शोभा कुक्कल