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इब्न-ए-इंशा: इस को नाम जुनूँ का दे लो प्यार कहो कि दुलार कहो

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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इस को नाम जुनूँ का दे लो प्यार कहो कि दुलार कहो


ऐसा और किसी का देखा दिल का कारोबार कहो

बस्ती में दीवाना समझो दश्त में हम को ख़्वार कहो
उन से एक न एक बहाने होना था दो चार कहो

और किसी के दर पर जाएँ छोड़ के उन का द्वार मगर
ऐसी अच्छी आँखों वाले कितने हैं सरकार कहो

तुम ने हाल हमारा देखा तुम जो बाग़ ओ बहाराँ में
गुल को चाक-बदामाँ जानो नर्गिस को बीमार कहो

बीच भँवर के मंज़िल करते हम तो यूँ भी पहुँचेंगे
एक टके में ले चलते हो माँझी दरिया पार कहो

हम भी तिरे कौनैन भी तेरे दुनिया क्या और 'उक़्बा क्या
बीच में क्यूँ ऐ दोस्त उठा दी ना-हक़ की दीवार कहो

'इंशा' जी ये फ़ैज़ है किस का क्या है उस का नाम मक़ाम
हम तो रंग तुम्हारा जानें ऐसे कब अश'आर कहो
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11 hours ago
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