बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है
मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वो इस दुनिया की औरत है
~ असरार-उल-हक़ मजाज़
बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं
और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
~ इफ़्तिख़ार आरिफ़
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कौन बदन से आगे देखे औरत को
सब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में
~ हमीदा शाहीन
शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं
~ मुनीर नियाज़ी
एक के घर की ख़िदमत की और एक के दिल से मोहब्बत की
दोनों फ़र्ज़ निभा कर उस ने सारी उम्र इबादत की
~ ज़ेहरा निगाह
ये 'औरतों में तवाइफ़ तो ढूँढ़ लेते हैं
तवाइफ़ों में इन्हें 'औरतें नहीं मिलतीं
~ मीना नक़वी
तू आग में ऐ औरत ज़िंदा भी जली बरसों
साँचे में हर इक ग़म के चुप-चाप ढली बरसों
~ हबीब जालिब
औरत हूँ मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हूँ
इक सच के तहफ़्फ़ुज़ के लिए सब से लड़ी हूँ
~ फ़रहत ज़ाहिद
देख कर शाइ'र ने उस को नुक्ता-ए-हिकमत कहा
और बे-सोचे ज़माने ने उसे ''औरत'' कहा
~ शाद आरफ़ी
तिरे माथे पे ये आँचल बहुत ही ख़ूब है लेकिन
तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था
~ असरार-उल-हक़ मजाज़
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