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International Women's Day 2026: महिला दिवस पर चुनिंदा शेर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है
मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वो इस दुनिया की औरत है
~ असरार-उल-हक़ मजाज़

बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं
और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
~ इफ़्तिख़ार आरिफ़
 
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कौन बदन से आगे देखे औरत को
सब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में
~ हमीदा शाहीन

शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं
~ मुनीर नियाज़ी

एक के घर की ख़िदमत की और एक के दिल से मोहब्बत की
दोनों फ़र्ज़ निभा कर उस ने सारी उम्र इबादत की
~ ज़ेहरा निगाह

ये 'औरतों में तवाइफ़ तो ढूँढ़ लेते हैं
तवाइफ़ों में इन्हें 'औरतें नहीं मिलतीं
~ मीना नक़वी

तू आग में ऐ औरत ज़िंदा भी जली बरसों
साँचे में हर इक ग़म के चुप-चाप ढली बरसों
~ हबीब जालिब

औरत हूँ मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हूँ
इक सच के तहफ़्फ़ुज़ के लिए सब से लड़ी हूँ
~ फ़रहत ज़ाहिद

देख कर शाइ'र ने उस को नुक्ता-ए-हिकमत कहा
और बे-सोचे ज़माने ने उसे ''औरत'' कहा
~ शाद आरफ़ी

तिरे माथे पे ये आँचल बहुत ही ख़ूब है लेकिन
तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था
~ असरार-उल-हक़ मजाज़

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7 महीने पहले
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