विज्ञापन

Urdu Poetry: निदा फ़ाज़ली की ख़ूबसूरत नज़्म 'यूँ तो हर रिश्ते का अंजाम यही होता है'

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            


यूँ तो हर रिश्ते का अंजाम यही होता है
फूल खिलता है
महकता है
बिखर जाता है
तुम से वैसे तो नहीं कोई शिकायत
लेकिन
शाख़ हो सब्ज़
तो हस्सास फ़ज़ा होती है
हर कली ज़ख़्म की सूरत ही जुदा होती है
तुम ने
बे-कार ही मौसम को सताया वर्ना
फूल जब खिल के महक जाता है
ख़ुद-ब-ख़ुद
शाख़ से गिर जाता है

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pankaj Sharma

1223 कविताएं

View Profile