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Urdu Poetry: अहमद फ़राज़ की सबसे ज़्यादा पढ़ी गई नज़्म 'रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ'

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ

पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिए आ

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

इक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिर्या से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को रुलाने के लिए आ

अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़ह्म को तुझ से हैं उमीदें
ये आख़िरी शम'एँ भी बुझाने के लिए आ

2 वर्ष पहले
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