विज्ञापन

आज का शब्द: विक्षत और केदारनाथ अग्रवाल की कविता- घन गरजे जन गरजे

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विक्षत, जिसका अर्थ है- जिसमें क्षत लगा हो, जिसमें खराश पड़ी हो, घायल, आहत, चोटिल। प्रस्तुत है केदारनाथ अग्रवाल की कविता- घन गरजे जन गरजे
        
                                                    
                            

घन गरजे जन गरजे
बन्दी सागर को लख कातर
एक रोष से
घन गरजे जन गरजे
क्षत-विक्षत लख हिमगिरी अन्तर
एक रोष से
घन गरजे जन गरजे
क्षिति की छाती को लख जर्जर
एक शोध से
घन गरजे जन गरजे
देख नाश का ताण्डव बर्बर
एक बोध से
घन गरजे जन गरजे।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

7 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all