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आज का शब्द: स्तव और सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता 'भारति जय विजयकरे'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है स्तव जिसका अर्थ है - किसी देवता की छंदोबद्ध स्तुति, प्रशंसा। कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 
        
                                                    
                            

भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!

लंका पदतल शतदल
गर्जितोर्मि सागर-जल,
धोता शुचि चरण युगल
स्तव कर बहु-अर्थ-भरे।

तरु-तृण-वन-लता वसन,
अंचल में खचित सुमन,
गंगा ज्योतिर्जल-कण
धवल-धार हार गले।

मुकुट शुभ्र हिम-तुषार,
प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!
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28 मिनट पहले
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