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आज का शब्द: संकल्प और श्रीकांत वर्मा की कविता- वह मेरी नियति थी

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- संकल्प, जिसका अर्थ है- दृढ़ निश्चय, पक्का विचार, सभा समिति आदि में किसी विषय में विचारपूर्वक किया हुआ पक्का निश्चय, मन्तव्य। प्रस्तुत श्रीकांत वर्मा की कविता- वह मेरी नियति थी

कई बार मैं उससे ऊबा 
और 
नहीं—जानता—हूँ—किस ओर 
चला गया। 

कई बार मैंने संकल्प किया। 
कई बार 
मैंने अपने को 
विश्वास दिलाने की कोशिश की— 
हममें से हरेक 
संपूर्ण है। 

कई बार मैंने निश्चय किया 
जो होगा सो होगा 
रह लूँगा— 
और इस ख़याल पर 
मुग्ध होता हुआ 
कि मैं एक पहाड़ हूँ 
समूचे आकाश को 
अकेला सह लूँगा। 
कई बार मैंने पौरुष का नक़ाब ओढ़ 
वह कुछ छिपाना चाहा 
जो अंदर 
कुरेद रहा था। 
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कई बार एक अँधेरे से निकल 
दूसरे अँधेरे में 
जाने की कोशिश की, 
लेकिन प्रत्येक बार 
रुका 

और 
मुड़ा 
और 
नहीं जानता हूँ क्यों 
अपने ही बनाए हुए 
रास्तों को 
अपनी ही 
पीठ लाद 
वहाँ लौट आया 
वह जहाँ 
निढाल पड़ी हुई थी 

कई बार मैं उससे 
ऊबा 
लेकिन प्रत्येक बार 
वहीं लौट आया। 
2 वर्ष पहले
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