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आज का शब्द: नीरधि और सोहनलाल द्विवेदी की कविता 'प्रबल झंझावात में तू बन अचल हिमवान रे मन'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है नीरधि जिसका अर्थ है समुद्र; सागर। कवि सोहनलाल द्विवेदी ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 
        
                                                    
                            

प्रबल झंझावात में तू
बन अचल हिमवान रे मन।

हो बनी गम्भीर रजनी,
सूझती हो न अवनी,
ढल न अस्ताचल अतल में
बन सुवर्ण विहान रे मन।

उठ रही हो सिन्धु लहरी
हो न मिलती थाह गहरी
नील नीरधि का अकेला
बन सुभग जलयान रे मन।

कमल कलियाँ संकुचित हो,
रश्मियाँ भी बिछलती हो,
तू तुषार गुहा गहन में
बन मधुप की तान रे मन।
 
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