'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- मधुऋतु, जिसका अर्थ है- वसंत ऋतु, मधुकाल, प्रेम-संयोग काल। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- कोई नहीं, कोई नहीं!
कोई नहीं, कोई नहीं!
यह भूमि है हाला-भरी,
मधुपात्र-मधुबाला-भरी,
ऐसा बुझा जो पा सके मेरे हृदय की प्यास को-
कोई नहीं, कोई नहीं!
सुनता, समझता है गगन,
वन के विहंगों के वचन,
ऐसा समझ जो पा सके मेरे हृदय- उच्छ्वास को-
कोई नहीं, कोई नहीं!
मधुऋतु समीरण चल पड़ा,
वन ले नए पल्लव खड़ा,
ऐसा फिरा जो ला सके मेरे लिए विश्वास को-
कोई नहीं, कोई नहीं!
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