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आज का शब्द: लोरी और उदय प्रकाश की कविता 'जहाँ चुप रहना था मैं बोला'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है लोरी जिसका अर्थ है - 1. बच्चों को सुलाते समय गाया जाने वाला गीत 2. तोते की एक प्रजाति। कवि उदय प्रकाश ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 
        
                                                    
                            

जहाँ चुप रहना था,
मैं बोला।
जहाँ ज़रूरी था बोलना,
मैं चुप रहा।

जब जलते हुए पेड़ से
उड़ रहे थे सारे परिन्दे
मैं उसी डाल पर बैठा रहा।

जब सब जा रहे थे बाज़ार
खोल रहे थे अपनी-अपनी दुकानें
मैं अपने चूल्हे में
उसी पुरानी कड़ाही में
पका रहा था कुम्हड़ा

जब सब चले गए थे
अपने-अपने प्यार के मुकर्रर वक़्त और
तय जगहों की ओर
मैं अपनी दीवार पर पीठ टिकाए
पूरी दोपहर से शाम
कर रहा था अय्याशी

रात जब सब थक कर सो चुके थे
देख रहे थे अलग-अलग सपने
लगातार जागा हुआ था मैं

मेरे ख्वाजा
मुझे दे नींद ऐसी
जो कभी टूटे ना
किसी शोर से

जहाँ मैं लोरियाँ सुनता रहूँ
अपने इस जीवन भर।
4 वर्ष पहले
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