विज्ञापन

आज का शब्द: कनेर और रामविलास शर्मा की कविता- दिवा स्वप्न

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- कनेर, जिसका अर्थ है- एक पेड़ जिसमें लाल या पीले सुन्दर फूल लगते हैं। प्रस्तुत है रामविलास शर्मा की कविता- दिवा स्वप्न 

वर्षा से धुल कर निखर उठा नीला-नीला 
फिर हरे-हरे खेतों पर छाया आसमान, 
उजली कुँआर की धूप अकेली पड़ी हार में, 
लौटे इस बेला सब अपने घर किसान। 

पागुर करती छाहीं में, कुछ गंभीर अध-खुली आँखों से, 
बैठी गाएँ करतीं विचार, 
सूनेपन का मधु-गीत आम की डाली में, 
गाती जातीं मिल कर ममाखियाँ लगातार। 

भरे रहे मकाई ज्वार बाजरे के दाने, 
चुगती चिड़ियाँ पेड़ों पर बैठीं झूल-झूल, 
पीले कनेर के फूल सुनहले फूले पीले, 
लाल-लाल झाड़ी कनेर की, लाल फूल। 
विज्ञापन

बिकसी फूटें, पकती कचेलियाँ बेलों में, 
ढो ले आती ठंडी बयार सोंधी सुगंध, 
अंतस्तल में फिर पेठ खोलती मनोभवन के, 
वर्ष-वर्ष से सुधि के भूले द्वार बंद। 

तब वर्षों के उस पार दीखता, खेल रहा वह, 
खेल-खेल में मिटा चुका है जिसे काल, 
बीते वर्षों का मैं, जिसको है ढँके हुए 
गाढ़े वर्षों की छायाओं का तंतु-जाल। 

देखती उसे तब अपलक आँखें, रह जातीं 
देखती उसे ही आँखें धर एकांत ध्यान, 
भूल अतीत का स्वप्न जागता, मिट जाता 
संकुचित एक पल-सा हो फीका वर्तमान। 

देखतीं उसे ही, भर आतीं आँखें, फिर पलकें 
झँप जातीं, खो जाती छवि वह निराकार, 
मैं रह जाता फिर प्रतिदिन-सा ही 
गरजता अनागत का अगाध फिर अंधकार। 
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all