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आज का शब्द: दिव और महादेवी वर्मा की कविता 'कोई यह आँसू...'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है दिव जिसका अर्थ है - 1. स्वर्ग 2. आकाश 3. दिन। कवयित्री महादेवी वर्मा ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 



कोई यह आँसू आज माँग ले जाता!

तापों से खारे जो विषाद से श्यामल,
अपनी चितवन में छान इन्हें कर मधु-जल,
फिर इनसे रचकर एक घटा करुणा की
कोई यह जलता व्योम आज छा आता!

वर क्षार-शेष की माँग रही जो ज्वाला,
जिसको छूकर हर स्वप्न बन चला छाला,
निज स्नेह-सिक्त जीवन-बाती से कोई,
दीपक कर इसको उर-उर में पहुँचाता!

तम-कारा-बंदी सांध्य रंगों-सी चितवन;
पाषाण चुराए हैं लहरों से स्पंदन,
ये निर्मम बंधन खोल तड़ित से कर से,
चिर रंग रूपों से फिर यह शून्य बसाता!

सिकता से तुलसी साध क्षार से उर-धन,
पारस-साँसें बेमोल ले चला हर क्षण,
प्राणों के विनिमय से इनको ले कोई, 
दिव का किरीट भू का शृंगार बनाता! 
 
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