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रवींद्रनाथ और गांधी ने मुझे बेहद प्रभावित किया - कालिंदी चरण पाणिग्रही

दीपाली अग्रवाल

Mud Mud Ke Dekhta Hu
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मैं ओडिशा के पुरी में पैदा हुआ। पुरी में स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने कॉलेज की पढ़ाई कटक में की, क्योंकि तब उच्च शिक्षा के लिए युवा ज्यादातर कटक ही जाते थे। मेरे पिता वैसे तो वकील थे, लेकिन दुनियावी चिंताओं से दूर वह हमेशा दार्शनिक की तरह सोचा करते थे। मेरे बड़े भाई स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ लेखक भी थे। उन्होंने उस दौर में कई कहानियां और उपन्यास लिखे थे। उन्होंने मेरी शुरुआती कविताएं देखीं और मुझे जरूरी दिशा-निर्देश देते रहे। जबकि मेरा छोटा भाई भगवती चरण विश्वविद्यालय के बेहद होनहार छात्रों में गिना जाता था। वामपंथी विचारों से प्रभावित मेरा वह भाई किसानों और मजदूरों के बीच काम करता था। ओडिशा में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना उसी ने की थी। लेकिन वामपंथी कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए बेहद कम उम्र में उसकी मृत्यु हो गई। एक कवि के तौर पर अपने परिवार की इन घटनाओं ने मुझे प्रभावित किया। चूंकि मेरे जैसे विचार के लोगों के लिए सरकारी नौकरी करना मुश्किल था, ऐसे में, मैंने पत्रकारिता को पेशे के रूप में चुना। जीवन में दो लोगों ने मुझे बेहद प्रभावित किया। इनमें से पहले व्यक्ति थे रवींद्रनाथ, और दूसरी शख्सियत थे महात्मा गांधी। जिस वक्त मैं रवींद्रनाथ की रोमांटिक कविताओं के प्रति सम्मोहित हुआ, उस समय ओडिया साहित्य मार्क्सवाद से बेहद प्रभावित था तब अन्नदाशंकर राय और वैकुंठ पटनायक के साथ मिलकर मैंने सबुज समिति नाम की संस्था गठित की थी। 



अलबत्ता बाद में गांधी के जीवन ने व्यक्ति और साहित्यकार के तौर पर भी मुझे आमूलचूल बदल दिया। गांधी को जाने-समझे बिना मेरे लिए मातृ मनीषा जैसा उपन्यास लिख पाना असंभव होता। मेरी बेटी नंदिनी सत्पथी ने मुझसे लेखन के संस्कार हासिल किए, लेकिन लेखिका के बजाय ओडिशा की मुख्यमंत्री के रूप में उसे ज्यादा लोग जानते हैं।


- प्रसिद्ध ओडिया कवि
7 वर्ष पहले
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