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धरती की कसम सबसे पक्की कसम होती है: रसूल हमजातोव

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
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                                                  वक्त बदलता है और उसके साथ जिंदगी भी। सिर की टोपियां ही नहीं बदलीं, (फर की टोपियों की जगह छज्जेदार हल्की टोपियां) बल्कि टोपियों के नीचे जवान लोगों के दिमागों में विचार भी बदल गए हैं। तरह-तरह की जातियों, कबीलों और जनगण का आपस में मेल हो रहा है। हमारे बेटों की कब्रें पिताओं के गांवों से अधिकाधिक दूर होती जा रही हैं... पत्थर, सिलें, बड़े-बड़े पत्थर, छोटे-छोटे कंकड़, गोल पत्थर, नुकीले पत्थर। इन पत्थरों पर कुछ उगाने के लिए पहाड़ के दामन से टोकरियां भर-भरकर मिट्टी ऊपर ढोई जाती है। पतझर और जाड़े में घास से ढंकी ढालों को जलाया जाता था ताकि ज्यादा अच्छी घास उगे। पहाड़ों में इन अनेक ज्वालाओं की मुझे याद है।    
                                                              
                  

                    
                                        
                         
                                                                                   
                            
                         
                                                            
                                
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तब बूढ़े एक-दूसरे पर मिट्टी के गोले फेंकते थे...

पहली हल-रेखा के पर्व की भी मुझे याद है। वसंत। तब बूढ़े एक-दूसरे पर मिट्टी के गोले फेंकते थे। कामकाजी आदमी के बारे में हमारे यहां कहा जाता है - 'बहुत-से पर्वत और चोटियां लांघी हैं उसने।' निकम्मे आदमी के बारे में कहा जाता है - 'उसने तो पत्थर पर एक बार भी कुदाल नहीं चलाई।' 'आपके खेत में फसलों की इतनी अधिक बालें हों कि उनके लिए जगह काफी न रहे,' पहाड़ी लोगों की यह सबसे अच्छी शुभकामना होती है। तुम्हारी जमीन सूख जाए, बंजर हो जाए,' सबसे बड़ा शाप होता है।

किसी पराये खेत में आ जानेवाले गधे की हत्या की जा सकती थी...

'इस धरती की कसम,' सबसे पक्की कसम यही होती है। किसी पराये खेत में आ जानेवाले गधे की हत्या की जा सकती थी और इसके लिए कोई सजा नहीं होती थीं। एक पहाड़ी आदमी चिल्लाकर कहता रहा था - 'अगर हाजी-मुरात का गधा भी मेरी धरती पर आ जाएगा, तो उसकी भी खैर नहीं!' हर गांव के अपने नियम थे। किंतु सभी जगहों पर खेत या धरती को हानि पहुंचाने के लिए सबसे बड़ा जुर्माना वसूल किया जाता था।

-अवार भाषा के प्रसिद्ध रूसी लेखक
 
एक वर्ष पहले
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