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संगीत और शब्दों की ध्वनियां मेरे लिए जरूरी रही हैं

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
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                            मेरा लेखन, मेरी सोच कई दशकों से, कई तरह से बनती हुई, अपना रास्ता बना रही है। संगीत और शब्दों की ध्वनियां मेरे लिए एक साथ काम करती हुईं, हमेशा मेरे लिए जरूरी रही हैं। यह जरूरी नहीं है कि उनका सुनना आसान हो, वह बिखरा, टूटा और असंगत संगीत भी हो सकता है। हम चाहें या न चाहें, हमारे कान एक दिन में बहुत कुछ ग्रहण कर लेते हैं। हो सकता है, कुछ उत्तर अमरेकियों के कानों को कविता नहीं भाती हो, क्योंकि वे आक्रामक सत्तासीन लोकाचार के कोलाहल से, जिसमें युद्ध, सफलता, राष्ट्रीय सुरक्षा, जय-पराजय, स्वामित्व, जिन्सों, डिब्बा-बंद सूचनाएं, डिब्बा-बंद हंसी की इतनी आवाजें शामिल हैं, आक्रांत हैं। कविता प्रत्यक्ष हो सकती है, बोल-चाल की हो सकती है।
        
                                                    
                            

वह तात्कालिक या आक्रोश से भरी हो सकती है। लेकिन वह रिक्त कोलाहल नहीं है, वह इस तरह की भाषा को अपदस्थ करना चाहती है। वह दूसरी तरह की ध्वनियों को सुनना चाहती है। मैं नहीं जानती कि कविता का कोई सार्वभौम या असाधारण दायित्व है। यह एक महान सतत सृजन का मानवीय कर्म है, जो विभिन्न समयों और विभिन्न स्थितियों में गतिमान रहता है। इस समय में, जिसे हम ‘अपना समय’ कहते हैं, कवि झूठी सूचनाओं और कृत्रिम विचलन के भंवरों से बचे।

उसका यही दायित्व है कि वह इसकी जालसाजी न करे, एक झूठी मासूमियत का अभ्यास न करे, जो पड़ोस में या दूसरे शहर में हो रहा है, उसकी पर्दादारी न करें। छिछले फॉर्मूलों, एक आलसी अराजकतावाद, और एक दमघोंटू आत्मिक संदर्भ को न माने। हमारा इसके अतिरिक्त दूसरा कोई दायित्व नहीं है कि हम एक सम्मानजनक मनुष्य की तरह व्यवहार करें। दूसरों की ईमानदारी और भलमनसाहत, साहस और पारदर्शिता को एक व्यापक सामाजिक समन्वय में स्वीकार करें।

-अड्रिएन रिच, मशहूर अमेरिकी कवयित्री

 
11 महीने पहले
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