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बूंद-बूंद है ओस

Ghanshyam Bairagi

Mud Mud Ke Dekhta Hu
                                    
                                                                        
                            ☆ बूंद-बूंद है ओस ☆
        
                                                    
                            

ठंड की धमक
ओस की चमक,
बूंद-बूंद है ओस ।

घटा छाई हुई
धुंआ-धुंआ सा,
टपकते जैसे
बूंद-बूंद है ओस ।

सिकुड़ती पवन
धुंध के बीच,
सिकुड़ती काया
बूंद-बूंद है ओस ।

गरीबी की ओट में
बहती तरंंग,
छप्पर से टपकती
बूंद-बूंद है ओस ।

छोटी सी उंगली में
छुटकी सजो रही,
छप्पर से टपकती
बूंद-बूंद है ओस ।

मध्यम सूरज की गति
देता है जोर,
नहीं है सहज
रोकना
बूंद-बूंद है ओस ।

रात की पहर बीती
सुहानी
सुबह सूरज की,
मोती सी चमक
बूंद-बूंद है ओस ।

- घनश्याम जी.बैरागी



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