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स्मृति शेष: ज़िंदगी कैसी है पहेली.. लिखने वाले गीतकार योगेश के 5 सुपरहिट नग़मे

deepali agrawal

Mere Azeez Filmi Nagme
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                                                  गीतकार योगेश ने अपने समय में सबसे बेहतरीन फिल्मकार रहे ऋषिकेश मुखर्जी, बासु चटर्जी आदि के साथ खूब काम किया है। हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की फिल्म 'आनंद' के लिए भी उन्होंने गीत लिखे हैं। उनके लिखे सबसे बेहतरीन गीतों में 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए', 'जिंदगी कैसी है पहेली', 'रिमझिम गिरे सावन', 'कई बार यूं ही देखा है', 'ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा' आदि शामिल हैं।

योगेश का जन्म 19 मार्च 1943 में उत्तर प्रदेश के राजधानी लखनऊ में हुआ था। वह जब बेरोजगार थे तब उन्होंने काम की तलाश में मुंबई आना ही उचित समझा। यहां उनके चचेरे भाई एक स्क्रीनप्ले निदेशक हुआ करते थे। उन्हीं के साथ योगेश ने भी काम करना शुरू कर दिया। लिखना शुरू करने के साथ ही योगेश ने कई बेहतरीन गीत लिखे जिन्हें सिनेमा के बेहतरीन गायकों ने अपनी आवाज दी। योगेश सिर्फ गीतों तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने फिल्मों के अलावा कई टीवी धारावाहिकों की कहानी भी लिखी। बीते शुक्रवार को उनका निधन हो गया। 

पेश हैं उनके लिखे सुपरहिट नग़मे-
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ज़िंदगी कैसी है पहेली

गीत : ज़िंदगी कैसी है पहेली
फ़िल्म : आनंद (1971)
संगीतकार : सलील चौधरी
गीतकार : योगेश
गायक : मन्ना डे


ज़िंदगी ...
कैसी है पहेली, हाए
कभी तो हंसाये
कभी ये रुलाये

ज़िंदगी ...
कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे पीछे सपनों के भागे
एक दिन सपनों का राही
चला जाए सपनों के आगे कहाँ

ज़िंदगी ...
जिन्होने सजाए यहाँ मेले
सुख-दुख संग-संग झेले
वही चुनकर ख़ामोशी
यूँ चली जाए अकेले कहाँ
ज़िंदगी ...


कहीं दूर जब दिन ढल जाये

गीत : कहीं दूर जब दिन ढल जाये
फ़िल्म : आनंद (1971)
संगीतकार : सलील चौधरी
गीतकार : योगेश
गायक : मुकेश


 

कहीं दूर जब दिन ढल जाए 
साँझ की दुल्हन बदन चुराए 
चुपके से आए
मेरे ख़यालों के आँगन में 
कोई सपनों के दीप जलाए, दीप जलाए
कहीं दूर ...

कभी यूँहीं, जब हुईं, बोझल साँसें 
भर आई बैठे बैठे, जब यूँ ही आँखें 
तभी मचल के, प्यार से चल के
छुए कोई मुझे पर नज़र न आए, नज़र न आए
कहीं दूर ...

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए

गीत : तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
फ़िल्म : सखी रोबिन (1962)
संगीतकार : रोबिन बैनर्जी
गीतकार : योगेश
गायक : मन्ना डे, सुमन कल्याणपुर
 

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

क्या कहूँ तुमसे कह नहीं सकता
बिन तुम्हारे मैं रह नहीं सकता
तुमको ग़र ऐतबार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

दिल पे मुझको तो ऐतबार नहीं
यह वो शय है जिसे क़रार नहीं
दिल पे ग़र इख्तियार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए


रजनीगंधा फूल तुम्हारे महके यूँ ही जीवन में

गीत: रजनीगंधा फूल तुम्हारे महके यूँ ही जीवन में
फ़िल्म : रजनीगंधा (1974)
संगीतकार : सलील चौधरी
गीतकार : योगेश
गायक : लता मंगेशकर

 

रजनीगंधा फूल तुम्हारे महके यूँ ही जीवन में
ओ... जैसे महके प्रीत पिया की मेरे अनुरागी मन में
रजनीगंधा...

हर पल मेरी इन आँखों में बस रहते हैं सपने उनके
मन कहता है मैं रंगों की एक प्यार भरी बदली बनकर
बरसूँ उनके जीवन में
रजनीगंधा...

अधिकार ये जबसे साजन का हर धड़कन पर माना मैंने
मैं जबसे उनके साथ बंधी ये भेद तभी जाना मैंने
कितना सुख है बंधन में

रिम-झिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाये मन

गीत : रिम-झिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाये मन
फ़िल्म : मंजिल (1979)
संगीतकार : राहुलदेव बर्मन
गीतकार : योगेश
गायक : किशोर कुमार, लता मंगेशकर


रिम-झिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन
रिम-झिम गिरे सावन ...

जब घुंघरुओं सी बजती हैं बूंदे,
अरमाँ हमारे पलके न मूंदे
कैसे देखे सपने नयन,  सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन
रिम-झिम गिरे सावन ...

महफ़िल में कैसे कह दें किसी से,
दिल बंध रहा है किस अजनबी से
हाय करे अब क्या जतन,  सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन
रिम-झिम गिरे सावन ...
6 वर्ष पहले
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