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कस्मे वादे प्यार वफ़ा सब बाते हैं बातों का क्या...

काव्य डेस्क

Mere Azeez Filmi Nagme
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                                                  'क़स्मे  वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या
कोई किसी का नहीं ये झूठे, नाते हैं नातों का क्या
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या'


1967 में रिलीज़ फिल्म उपकार ने कलाकार मनोज कुमार को भारत कुमार की संज्ञा दिलाई थी। लोकप्रिय फ़िल्म में एक से एक बेहतरीन गीत थे। सभी ने बॉलीवुड ने धूम मचाई थी। अमर गायक मन्ना डे की सुरीला आवाज़ में क़स्मे वादे प्यार वफा...गीत इस फिल्म का निचोड़ है। इस गीत में जीवन की यथार्थता से दर्शकों को रूबरू कराया गया है। जीवन के सच को पूरी तन्मयता से व्यक्त करता गीत इसलिए मुझे प्रिय है। इसके बोल आपको इस नश्वर जीवन का परिचय देते हैं। स्वार्थ, पैसा, शोहरत, एकांत जीवन, निस्वार्थ भाव, अहं सभी पहलुओं को इस  गीत में दर्शाया गया है। फिल्‍म को अपार लोकप्रियता हासिल हुई थी। तभी तो इस फिल्म को 6 फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। गीत के बोले इंदीवर ने लिखे हैं जबकि कल्याण जी आनंद जी ने इसे संगीत से सजाया है। फिल्म दो भाइयों के बीच स्वार्थ और निस्वार्थ भाव की बेहतरीन पेशगी है। शहर से पढ़ लिखकर जब छोटा भाई प्रेम चोपड़ा (पूरन) गांव आता है तो वह जमीन जायदाद के बंटवारे की मांग करता है। किसान मनोज कुमार (भारत) ने स्वयं की पढ़ाई रोक कर पूरन को पढ़ने के लिए शहर भेजा था लेकिन वापस आकर पूरन उसको अपमानित करता है। जमीन बंटती देख भारत दुखी होता है और वह सब कुछ छोड़कर भारत-पाक युद्ध लड़ने चला जाता है। वहीं पूरन गोरख धंधों में संलिप्त हो जाता है। पूरन एक ओर तो काला धंधा करता है तो दूसरी तरफ गांव वालों को मूर्ख बनाता है। 
भाइयों के बीच बंटवारे और अलगाव की पृष्ठभूमि पर यह गीत फिल्माया जाता है। 

विकलांग मलंग चाचा (प्राण) पर फिल्माए इस गीत के बोल इतने भारी है, दमदार हैं कि वह किसी को भी जीवन पर सोचने के लिए मजबूर कर सकते हैं। गीत का सार है कि इस अनजानी दुनिया में अधिकांश कस्मे-वादे सिर्फ कोरे वादे ही होते हैं। असल जिंदगी में उनका कोई वास्ता नहीं है। रिश्ते नाते इस रंग बदलती दुनिया में कोई महत्व नहीं रखते हैं। 

गीत की पंक्तियां हैं- 

'होगा मसीहा…
होगा मसीहा सामने तेरे
फिर भी न तू बच पायेगा
तेरा अपनाऽऽऽ आऽऽऽ
तेर अपना खून ही आखिर
तुझको आग लगायेगा
आसमान में…
आसमान मे उड़ने वाले मिट्टी में मिल जायेगा
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या'

इसमें कहा गया है कि आप कितने भी बड़े हो जाएं पर अपना पांव जमीन पर ही रखना। शौहरत और दौलत पलभर में नष्ट भी हो सकते हैं। आसमान में उड़ने वाले भी मिट्टी में ही मिलते हैं। इस‌लिए भूलकर भी अहं मत करो। 
 
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सुख में सब साथी हो जाते हैं लेकिन दुख में मदद पहुंचाने वाले बहुत कम ही मिलेंगे

उपकार

'सुख में तेरे…
सुख में तेरे साथ चलेंगे
दुख में सब मुख मोड़ेंगे
दुनिया वाले…
दुनिया वाले तेरे बनकर
तेरा ही दिल तोड़ेंगे
देते हैं…
देते हैं भगवान को धोखा, इनसां को क्या छोड़ेंगे
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या'

गीत यह भी कहता है कि सुख में सब साथी हो जाते हैं। लेकिन आपके दुख में आपको मदद पहुंचाने वाले बहुत कम ही मिलेंगे। गीत कहता है कि आदमी को अपने सच का सामना खुद करना होगा। वहीं जीवन की सच्चाई है। जब आपके पास दौलत होगी तो हर कोई आपका साथी बन जाएगा। कहते हैं कि जब आपके पास पैसा होता है तो आपको किसी शहर, नगर, अनजान जगह में लोगों का साथ मिल जाता है। लेकिन अगर आपके पास पैसा नहीं हो तो आप अपने घर में भी अकेले हो जाएंगे। यह गीत इसी सच से रूबरू कराता है। गीत यह भी कहता है कि पहले आदमी नजदीक आता है और फिर करीबी बनकर दिल तोड़ता है। इंसान तो आजकल भगवान को आसानी से धोखा देते हैं। वो इंसान को तो यूं ही पलक झपकते ही धोखा दे देंगे।  

गीत का नैतिक पक्ष यह है कि माना कि इस रंग बदलती दुनिया में कोई अपना नहीं है। आदमी अंतत: अकेला है। पर इसका यह मतलब भी नहीं कि सभी से ध्यान हटा लो। यह तो एक तरह से आदमी के जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसा होगा। वह इस सोच के साथ खुदगर्ज हो जाएगा। गीत इसी की ओर संकेत करता हुआ कहता है कि इस दुनिया में भले कोई तुम्‍हारा नहीं है लेकिन फिर भी हमें कर्म करते हुए सबका साथ देते हुए सबके लिए उपयोगी बनना है। तभी जीवन सार्थक हो सकेगा। दूसरों का साथ देते हुए कर्म करते हुए जो खालीपन और सुकून मिलेगा, वही आपका सच होगा। यही आपके जीवन का यथार्थ होगा। 

आप यहां इस सुनहरे गीत को सुन सकते हैं-

9 वर्ष पहले
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