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जन्मदिन विशेष: अनोखी थी पंचम दा की संगीत छटा...

काव्य डेस्क

Mere Azeez Filmi Nagme
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                            हिंदी फिल्मों में एक से बढ़कर एक लाजवाब संगीतकारों ने दिल की बगियां महकाई है। राहुल देव बर्मन के संगीत ने युवा दिलों को धड़कना सिखाया था। 27 जून 2018 को राहुल देव बर्मन की 79 वीं जयंती है। राहुल देव को प्यार से पंचम दा कहा जाता है। उन्होंने कई सुमधुर गीतों में अपना दिलकश संगीत दिया। ऐसे ही एक गीत की हम यहां बात करेंगे। जो पंचम दा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि होगी।
        
                                                    
                            

देखो ओ दीवानो, तुम ये काम ना करो 
राम का नाम बदनाम ना करो, बदनाम ना करो...

फ़िल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का ये गाना धर्म के असली मर्म को समझाता है। भगवान राम हमारी सभ्यता में मर्यादा के प्रतीक हैं। उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम कहा जाता है। समाज में मर्यादा का क्या महत्व है भगवान राम का जीवन इसकी नज़ीर पेश करता है। राजा राम का जीवन आदर्श माना जाता है जिन्होंने नीति और धर्म को शासन की धुरी बनाया जहां प्रजा का कल्याण सबसे ऊपर था।

गीतकार आनंद बख़्शी ने इस गाने को क़लमबंद किया और आर.डी. बर्मन ने अपने संगीत से इस गाने को नए अर्थ दिए। किशोर कुमार ने अपनी आवाज़ से इस गाने को भक्ति रस में डूबो दिया जो सीधे आपके रूह को छू जाती है। यह गाना देवानंद और ज़ीनत अमान पर फ़िल्माया गया है और फ़िल्म का निर्देशन भी ख़ुद उन्होंने किया। 

गाने के बोल हैं - 

देखो ओ दीवानो, तुम ये काम ना करो  
राम का नाम बदनाम ना करो, बदनाम ना करो... \-2

राम को समझो, कृष्ण को जानो, नींद से जागो ओ मस्तानों... \-2 
जीत लो मन को पढ़ के गीता 
मन ही हारा तो क्या जीता, तो क्या जीता 
हरे कृष्णा हरे राम... \-2 
जीवन को नशे का तुम ग़ुलाम ना करो 
राम का नाम बदनाम ना करो, बदनाम ना करो 

राम ने हँस कर सब सुख त्यागे, तुम सब दुख से डर के भागे... \-2 
कृष्ण ने कर्म की रीत सिखाई 
तुमने फ़र्ज़ से आँख चुराई, हो राम दुहाई 
हरे कृष्णा हरे राम... \-2 
जीवन नाम है काम का, आराम ना करो 
राम का नाम बदनाम ना करो, बदनाम ना करो 
देखो ओ दीवानो ...

देखो ओ दीवानो, तुम ये काम ना करो 
राम का नाम बदनाम ना करो, बदनाम ना करो 

आज हम ऐसे समय में हैं जहां धर्म की आड़ में लोग अपने व्यवसाय, कुकृत्यों को भी जायज़ ठहराने की कोशिश करते हैं। राम का नाम लेकर किए जाने वाले हर उस काम की घोर निंदा की जानी चाहिए जो जुर्म के दायरे में आता है। लोग धर्म का नाम लेकर हिंसा पर उतारू हो जाते हैं और भगवान के बंदों की जान लेने से भी नहीं कतराते। जो इंसान को इंसान भी नहीं समझते वे धर्म को क्या जानेंगे? धर्म और इंसानियत का जज़्बा त्याग में है न कि ज़ोर-ज़बरदस्ती में। 

यूट्यूब पर मौजूद इस गाने का वीडियो यहां देखें - 

 

 
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