सावन के महीने में दिल झूमकर नाचता-गाता है। बारिश की फ़ुहारों के बीच किसी मयूर को नृत्य करते देखना सुखद है। हरे पेड़ थोड़े और सब्ज़ महसूस होते हैं। ऐसे वातावरण को कोई फ़िल्मों में कैसे न चित्रित करता। इसलिए सावन के मल्हार फ़िल्मों मेें गाए गए और दर्शाए भी गए। आपके लिए कुछ ख़ास गीत
फ़िल्म: पाकीज़ा (1971)
संगीत: गुलाम मोहम्मद
गीतकार: कमल अमरोही
गायक: लता मंगेशकर
मौसम है आशिकाना
ऐ दिल कहीं से उनको ऐसे में ढूंढ लाना
कहना के रुत जवां है, और हम तरस रहे हैं
काली घटा के साये, बिरहन को डस रहे हैं
डर है न मार डाले, सावन का क्या ठिकाना
मौसम है आशिकाना
विज्ञापन
फ़िल्म: मंजिल (1979)
संगीत: आर.डी.बर्मन
गीतकार: योगेश
गायक: लता मंगेशकर, किशोर कुमार
रिमझिम गिरे सावन
सुलग-सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में
लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन...
पहले भी यूँ तो बरसे थे बादल
पहले भी यूँ तो भीगा था आँचल
अब के बरस क्यूँ सजन, सुलग-सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में...
इस बार सावन दहका हुआ है
इस बार मौसम बहका हुआ है
जाने पी के चली क्या पवन, सुलग-सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में...
फ़िल्म: नमक हलाल (1982)
संगीत: बप्पी लाहिरी
गीतकार: अनजान
गायक: किशोर कुमार, आशा भोंसले
आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो
आज फिसल जायें तो हमें ना उठइयो
हमें जो उठइयो तो ख़ुद भी रपट जइयो
हाँ ख़ुद भी फिसल जइयो
बरसात में थी कहाँ कभी बात ऐसी
पहली बार बरसी बरसात ऐसी
कैसी ये हवा चली, पानी में आग लगी
जाने क्या प्यास जगी रे
भीगा ये तेरा बदन, जगाये मीठी चुबन
नशे में झूमें ये मन रे
कहाँ हूँ मैं, मुझे भी ये होश नहीं रे
आज बहक जायें तो होश न दिलइयो
होश जो दिलइयो तो ख़ुद भी बहक जइयो
फ़िल्म: दिल तो पागल है (1997)
संगीत: उत्तम सिंह
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक: लता मंगेशकर, उदित नारायण
चाक धूम धूम, चाक धूम धूम
घोड़े जैसी चाल, हाथी जैसी दुम
ओ सावन राजा, कहाँ से आए तुम
कोई लड़की है जब वो हँसती है
चाक धूम धूम...
कोई लड़की है, जब वो हँसती है
बारिश होती है छनक छनक छुम छुम
कोई लड़का है जब वो गाता है
चाक धूम धूम...
अरे कोई लड़का है, जब वो गाता है
सावन आता है घुमड़ घुमड़ घूम घूम
गीतकार: प्रसून जोशी,
गायक: शुभा मुद्गल,
संगीतकार: शंतनू मोईत्रा,
गीत संग्रह/चित्रपट: अब के सावन (1999)
अब के सावन ऐसे बरसे,
बह जाये रंग मेरी चुनर से
भीगे तन मन जियरा तरसे,
जम के बरसे जरा
रुत सावन की, घटा सावन की,
घटा सावन की, ऐसे जमके बरसे
अब के सावन ऐसे बरसे,
हे बह जाये रंग मेरी चुनर से
भीगे तन मन जियरा तरसे,
जम के बरसे जरा
झड़ी बरखा की, लड़ी बूंदों की,
लड़ी बूंदों की, टूट के यूँ बरसे
रुत सावन की, घटा सावन की
फ़िल्म: गुरु (2007)
संगीत: ए.आर.रहमान
गीतकार: गुलज़ार
गायिका: श्रेया घोषाल
बरसो रे मेघा-मेघा
बरसो रे, मेघा बरसो
मीठा है कोसा है, बारिश का बोसा है
जल-थल-चल-चल
चल-चल बहता चल
गीली-गीली माटी, गीली माटी के
चल घरौंदे बनायेंगे रे
हरी भरी अम्बी, अम्बी की डाली
मिल के झूले झुलाएंगे रे
धन बैजू गजनी, हल जोते सबने
बैलों की घंटी बजी, और ताल लगे भरने
रे तैर के चली, मैं तो पार चली
पार वाले पर ले किनारे चली