सावन के महीने में दिल झूमकर नाचता-गाता है। बारिश की फ़ुहारों के बीच किसी मयूर को नृत्य करते देखना सुखद है। हरे पेड़ थोड़े और सब्ज़ महसूस होते हैं। ऐसे वातावरण को कोई फ़िल्मों में कैसे न चित्रित करता। इसलिए सावन के मल्हार फ़िल्मों मेें गाए गए और दर्शाए भी गए। आपके लिए कुछ ख़ास गीत
फ़िल्म: पाकीज़ा (1971)
संगीत: गुलाम मोहम्मद
गीतकार: कमल अमरोही
गायक: लता मंगेशकर
मौसम है आशिकाना
ऐ दिल कहीं से उनको ऐसे में ढूंढ लाना
कहना के रुत जवां है, और हम तरस रहे हैं
काली घटा के साये, बिरहन को डस रहे हैं
डर है न मार डाले, सावन का क्या ठिकाना
मौसम है आशिकाना
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रिमझिम गिरे सावन
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